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गर्मी में पशुओं का ध्यान कैसे रखें? जानिए वो ज़रूरी बातें जो हर पशुपालक को पता होनी चाहिए
मई-जून की तपती धूप और लू का असर सिर्फ इंसानों पर नहीं, बल्कि हमारे पशुओं पर भी उतना ही पड़ता है, बल्कि कई बार उनसे भी ज़्यादा। एक पशुपालक की आमदनी सीधे उसके पशु की सेहत से जुड़ी होती है। अगर पशु बीमार पड़ा, दूध कम हुआ, या भगवान न करे कोई बड़ी तकलीफ आई तो नुकसान सिर्फ जेब का नहीं, दिल का भी होता है।
TabelaWala लेकर आया है आपके लिए जरूरी जानकारी, जिससे आप इस गर्मी अपने पशुओं को स्वस्थ, सुरक्षित और तंदुरुस्त रख सकें।
1. छाया और हवादार शेड — पहली और सबसे ज़रूरी शर्त गर्मी में पशुओं की देखभाल की शुरुआत होती है उनके रहने की जगह से। पशुओं को सीधी धूप में बाँधना सबसे बड़ी गलती है। शेड की छत पर सफेद रंग करवाएँ या घास-फूस या पराली की 3-4 इंच मोटी परत बिछाएं। इस पर समय-समय पर पानी छिड़कने से अंदर का तापमान 5 से 7 डिग्री तक कम हो जाता है। पर्दे और वेंटिलेशन: दोपहर के समय तबेले की खुली दिशाओं में जूट की बोरियों के पर्दे लगाएं और उन्हें गीला रखें। इससे अंदर आने वाली हवा ठंडी हो जाती है। 2. पानी — जितना सोचते हैं, उससे कहीं ज़्यादा ज़रूरी है गर्मी में एक दुधारू गाय या भैंस को प्रतिदिन 80-100 लीटर पानी की आवश्यकता हो सकती है। पानी की टंकी को छायादार स्थान पर रखें। पशु गर्म पानी पीना पसंद नहीं करते, जिससे उनमें डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) हो जाती है। ध्यान रखें: पानी की नाँद या खुरली को रोज़ साफ करें — गंदे पानी से पेट की बीमारियाँ फैलती हैं दिन में कम से कम 3-4 बार पशुओं के शरीर पर पानी का छिड़काव करें देसी नुस्खा: पानी में थोड़ा गुड़ और नमक मिलाएं। यह प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट का काम करता है और पशुओं को अंदर से ऊर्जा देता है। 3. आहार में बदलाव — गर्मी में खान-पान का सही तरीका गर्मी में पशु का पाचन तंत्र कमज़ोर पड़ जाता है। इसलिए भारी और सूखा चारा कम करें और हरे चारे की मात्रा बढ़ाएँ। बरसीम, नेपियर घास और ज्वार जैसा हरा चारा पशु को ठंडक और नमी दोनों देता है। आहार में 30-50 ग्राम मिनरल मिक्सचर रोज़ाना ज़रूर मिलाएँ। इलेक्ट्रोलाइट पाउडर पानी में घोलकर देने से हीट स्ट्रेस का असर कम होता है। पशुओं को चारा खिलाने का सबसे सही समय सुबह 5 बजे से पहले और रात को 8 बजे के बाद है। दोपहर में उन्हें केवल हल्का हरा चारा ही दें। 4. बीमारियों से बचाव — लापरवाही पड़ती है भारी अगर आपका पशु मुँह खोलकर सांस ले रहा है, लार अधिक गिरा रहा है या खाना बिल्कुल बंद कर दिया है, तो यह 'लू' के लक्षण हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें और पशु के सिर पर ठंडी पट्टी रखें। क्या करें: गर्मी से पहले FMD और अन्य संक्रामक रोगों का टीकाकरण ज़रूर करवाएँ — सरकारी पशु चिकित्सालय में यह मुफ्त मिलता है। पशुशाला में हफ्ते में एक बार कीटाणुनाशक दवा का छिड़काव करें। 5. साफ-सफाई — बीमारी को दरवाज़े से ही रोकें गर्मी में गंदगी से बीमारियाँ दोगुनी रफ्तार से फैलती हैं। पशुशाला की रोज़ाना सफाई करें, गोबर और मूत्र को जमा न होने दें। मक्खी और मच्छर इस मौसम में सबसे ज़्यादा होते हैं और ये कई बीमारियों के वाहक होते हैं। नीम के पत्तों का धुआँ या नीम का तेल पशुशाला में लगाने से कीड़े-मकोड़े दूर रहते हैं।
6. हीट स्ट्रेस के लक्षण पहचानें — वक्त पर पहचान, वक्त पर इलाज
पशुपालक को यह पता होना चाहिए कि हीट स्ट्रेस कब हो रहा है। इन लक्षणों पर नज़र रखें:
- पशु का बार-बार मुँह खोलना और तेज़ साँस लेना
- शरीर का तापमान 39.5 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाना
- चारा और पानी बिल्कुल छोड़ देना
- अचानक दूध उत्पादन में तेज़ गिरावट
- पशु का एक जगह बैठे रहना और उठने में आनाकानी करना
अगर ये लक्षण दिखें तो पशु को तुरंत ठंडी जगह ले जाएँ, ठंडे पानी से नहलाएँ और पशु चिकित्सक को बुलाएँ।
गर्मी में पशुओं की सुरक्षा कोई मुश्किल काम नहीं है बस थोड़ी सजगता और नियमित देखभाल चाहिए। सही छाया, पर्याप्त पानी, संतुलित आहार, समय पर टीकाकरण और साफ-सफाई, ये बातें अगर आपने अपना ली, तो आपका पशु इस गर्मी में भी स्वस्थ, सुरक्षित और उत्पादक बना रहेगा।
याद रखिए — स्वस्थ पशु ही समृद्ध पशुपालक की नींव है।
अगर आप भी पशुपालन, डेयरी फार्मिंग और पशु प्रबंधन से जुड़ी ऐसी ही उपयोगी और जानकारीपूर्ण बातें जानना चाहते हैं, तो TabelaWala के साथ जुड़े रहिए।